Wednesday, 31 October 2012

जीवन में संकल्प जरुरी: राजिक राज

कहते हैं न किसी देश की तस्वीर और तक़दीर वहां रहने वाले लोगों के हाथों में है। और अगर कोई प्रजातान्त्रिक देश है तो लोगों की भागीदारी और बढ़ जाती है। अगर हम भारत की बात करें तो यह तो वीरों की भूमि रही है। समय-समय पर देश को आगे ले जाने का काम देश के मनीषियों ने किया है। उनके बताये राहों पर चलते हुए देश ने बहुत प्रगति भी की है और लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। इस धरती ने कई विभूतियों को जन्म दिया जिन्होंने पुरे दुनिया में अपने वतन का परचम लहराया। देश की ऐसी ही एक सुता जिसने दुनिया में भारत का लोहा मनवाया, दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत को अपने विश्वगुरु होने का अहसास कराया, जिसने आर्यावर्त की धरती की ओर आँख तरेरी उसे उसके हिसाब से जवाब दिया, जिसने  देश के बढ़ते  क़दमों को रोकने की कोशिश की उसको उसकी औकात बताई हम ऐसे देशभक्त को कैसे भूल सकते हैं। जी हाँ हम बात कर रहे हैं इंदिरा गाँधी की। माना की समय ने उन्हें पहले ही इस दुनिया से विदा कर दिया लेकिन लोगों के दिल से  किसी को हटाने की ताकत तो समय में भी नहीं है। 31 अक्टूबर 1984  को उनकी हत्या कर दी गयी लेकिन वो तो अमर हैं सदा अमर रहेंगी। इंदिरा गाँधी जी की पुण्यतिथि को हम राष्ट्रीय संकल्प दिवस के रूप में मानते हैं। इस बार भी हमने बांका जिला के राजवाड़ा गांव में नेहरु युवा केंद्र के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। हाँ राजिक राज कार्यक्रम में शरीक हुए और अपनी बात भी रखी। राज जी ने कहा की इंदिरा से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए की जीवन में संकल्पों का बड़ा महत्व है और  संकल्प ही वह शक्ति है जिसके दम पर मनुष्य आगे बढ़ता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा की आज आप एक संकल्प लें की जिस काम की शुरुआत करें उसे अंजाम तक जरुर पहुचाएं। इस अवसर पर नेहरु युवा केंद्र बांका के जिला युवा समन्वयक अमल किशोर पासवान, फनकार बलबीर सिंह बग्घा, उमेश यादव आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर राजिक राज सहित अन्य का सम्मान भी किया गया।


कार्यक्रम का शुभारम्भ करते अमल किशोर पासवान और राजिक राज 


इंदिरा गाँधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते राजिक राज 


इस अवसर पर राजिक राज का सम्मान भी किया गया 


Sunday, 21 October 2012

500 वर्ष पुराना है काली मंदिर



जैसा की हम आपको बता चुके हैं की हमारा संस्थान हर तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है। हम चाहते हैं की हमारे छात्र न सिर्फ शैक्षणिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध बने। विकास के इस दौड़ में उनका हर तरह से विकास हो यह हमारा लक्ष्य है। 13-10-2012 के लक्ष्मीपुर गाँव के भ्रमण के दौरान संस्थान के निदेशक राजिक राज पहुंचे स्थानीय काली मंदिर। स्थानीय नागरिक रामनाथ मिश्र जिनकी आयु लगभग 80 वर्ष के आसपास है की जानकारी के अनुसार यह मंदिर लक्ष्मीपुर स्टेट के राजा प्रताप नारायण देव के पूर्वजों ने आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व बनवाया था।  

राजिक राज ने महिलाओं को बताया स्वरोजगार के हुनर

जैसा की हम बता चुके हैं की यहाँ कंप्यूटर प्रशिक्षण के साथ-साथ विभिन्न तरह के कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। कार्यक्रम का मुख्य मकसद सिर्फ और सिर्फ छात्रों का सामूहिक विकास रहता है। आये दिन शहर के अलावे आसपास के गांवों और प्रखंडों में भी कार्यक्रम होते हैं और उसमे हमारी पूर्ण भागीदारी रहती है। हम आपको यह भी बता चुके हैं की ज्यादातर कार्यक्रम भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित होते हैं। कार्यक्रमों की इस कड़ी में संस्थान के निदेशक राजिक राज 13-10-2012 को कटोरिया प्रखंड के लक्ष्मीपुर गाँव पहुंचे। आज के ज़माने में महिलाएं अपने दम पर आसमान की बुलंदियों को छु रही हैं और हम भी इससे पूरी तरह वाकिफ हैं। समाज के विकास में महिलाओं की महती भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। आज देश के हर छोटे-बड़े जगहों पर महिलाएं प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में स्वरोजगार योजनाओं का बहुत बड़ा योगदान है। कहते हैं न हुनरमंद को किसी चीज़ के लिए मोहताज नहीं रहना पड़ता है ठीक इसी तरह जो कार्य पथ पर आगे बढ़ते रहता है वो जीवन में हर मुकाम हासिल करता है। हमारे संस्थान के निदेशक इस चीज़ को भलीभांति जानते हैं और ऐसे प्रयासों में अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित करते हैं। जब ऐसे ही एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो राजिक राज नेहरु युवा केंद्र बांका के जिला युवा समन्वयक अमल किशोर पासवान संग पहुँच गए कटोरिया प्रखंड के लक्ष्मीपुर गाँव। राजिक राज ने उपस्थित महिलाओं को तसर कीट पालन के बारे में बताया। राजिक जी ने महिलाओं से उनके कार्यों के बारे में भी जानकारी ली साथ ही उनको हरसंभव सहयोग करने का वादा भी किया। कार्यक्रम में राजिक राज का भव्य स्वागत किया गया।
 राजिक राज का  स्वागत करते लक्ष्मीपुर के पूर्व मुखिया नारायण भगत 

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि 
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं 

Tuesday, 16 October 2012

राजिक राज बने आईपर्सन

माइक्रो यूनिक कंप्यूटर संस्थान के निदेशक राजिक राज को स्पिक मैके का आईपर्सन बनाया गया। राज जी को यह जिम्मेदारी उनके सांस्कृतिक रुझानो के चलते दी गयी। विदित है की राज जी अपने संस्थान में लगातार सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देते आये हैं और यह क्रम लगातार जारी है। मेधा और प्रतिभा को पहचानने का काम राज जी लगातार करते रहे हैं।  राज जी को आईपर्सन बांका के जिलाधिकारी दीपक आनंद ने बनाया है।

Friday, 5 October 2012

हमने धूमधाम से मनाया गाँधी और शास्त्री जयंती


महात्मा गाँधी तो समूचे देश के राष्ट्रपिता हैं।उनके बताये रास्ते पर दुनिया चल रही है। सच्चे अर्थों में उनसे बड़ा प्रेरणादायक व्यक्ति शायद ही कोई हो। हम भी चाहते हैं की बापू के बताये  रास्ते पर चलें  और हम लगातार इस कोशिश में लगे हुए हैं। सत्य और अहिंसा को अपना मुख्य अस्त्र बनाना चाहते हैं। जब बापू के ही बातों को जीवन में उतारने की कोशिश की जा रही हो तो उनसे जुड़ी छोटी से छोटी बात भी याद रहती है। और जब बात हो किसी के सालगिरह की तो इसे कैसे भूला जा सकता है। हम भी नहीं भूल सकते जनाब और भूले भी कैसे जिसे सारा देश याद रखता हो उसे भूलने की खता हम कैसे करें। हमने भी गाँधी जयंती धूमधाम से मनाई। लेकिन एक बात तो आपको बताना भूल ही गए हमने लालबहादुर शास्त्री के जन्मदिन को भी उतने ही उत्साह के साथ मनाया। आपको इसकी झलकियाँ दिखाते हैं। हमने युवा शक्ति पुस्तकालय और नेहरु युवा केंद्र के सहयोग से इस समारोह को सफलतापूर्वक मनाया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में हमारे छात्र-छात्राओं की महती भूमिका रही। कहते हैं न संगठन तभी आगे बढ़ता है जब उसके लोग अच्छे और सच्चे हों।और हमारे छात्रों पर यह बात सटीक बैठती है। तो आईये आपको उन लम्हों की दीदार कराते  हैं। इस अवसर पर बांका के प्रशिक्षु आईएएस मिथिलेश मिश्र, माईक्रो यूनिक कंप्यूटर संस्थान के निदेशक राजिक राज, युवा शक्ति पुस्तकालय के अध्यक्ष राजीव झा, सत्यमूर्ति सिंह, रोहित कश्यप आदि ने गाँधी जी और शास्त्री जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.























अन्तरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस समारोह में भी लिया भाग

जैसा की हम आपको बता चुके हैं की हम आयोजन भी करते हैं और इसका मकसद है होता है सिर्फ और सिर्फ छात्रों का फायदा। कार्यक्रम का मकसद आपको हम बता ही चुके हैं और मुझे लगता है की आप भी इस संस्था के बारे में परिचित हो चुके होंगे। हम सिर्फ शिक्षा ही नहीं समाज को भी उतना ही महत्व देते हैं। आपको बताते चलें  की अन्तरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस समारोह में भी हमने हिस्सा लिया। हमारे छात्रों ने वहां भी अपनी प्रस्तुति दी  और उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। समारोह के मुख्य अतिथि बांका के प्रशिक्षु आईएएस मिथिलेश मिश्र ने भी प्रशंसा के शब्द कहे। कहते हैं की अगर आपके अन्दर जज्बा हो तो कोई भी कम आसान हो जाता है  और सही में होता भी ऐसा ही है। किसी के लिए उत्साह की क्या वजह होती है यह ऐसे आयोजनों में भागीदारी के बाद पता चलती है।

 कार्यक्रम में प्रस्तुति एमयूसीसी देती एमयूसीसी की  छात्रा पुष्पम राय 

समारोह में प्रस्तुति देती एमयूसीसी  पंजवारा शाखा की प्रमुख गरिमा भारती 

स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी का सम्मान करते मिथिलेश मिश्र साथ हैं एमयूसीसी  पंजवारा शाखा की प्रमुख गरिमा भारती 

बांका के अंचलाधिकारी विमल घोष संग बुजुर्ग का सम्मान करते एमयूसीसी के निदेशक राजिक राज 

 कार्यक्रम में प्रस्तुति देती एमयूसीसी की छात्रा तृप्ति उपाध्याय 

 कार्यक्रम में प्रस्तुति देते युवा शक्ति पुस्तकालय के छात्र सोनू कुमार 

Wednesday, 3 October 2012

संस्थान में हुआ हिंदी दिवस पखवाड़ा का समापन

जैसा की हम पहले ही बता चुके हैं की हम आयोजन भी करते हैं। आयोजन की इस कड़ी में हमने हिंदी दिवस पखवाड़ा जा आयोजन किया। 14 सितम्बर से शुरू हुए कार्यक्रम का समापन 28 सितम्बर को हुआ। समापन अवसर पर संस्थान में छात्रों को पुरस्कृत भी किया गया। हाँ आपको लगेगा की हमने तो यह बताया ही नहीं की पुरस्कार किस चीज़ के लिए दिया गया। तो जानिए यह पुरस्कार दिया गया वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं  को। जी हाँ हमारे संस्थान में 21 सितम्बर को हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, इसका विषय था क्या हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है? छात्रों ने बड़े ही शानदार ढंग से अपनी बात रखी। एक स्वस्थ प्रतियोगिता हुई। विषय भी शानदार था और प्रस्तुति भी जानदार रही। कहें तो पूरा माहौल ही हिंदीमय था। और जब माहौल भी अनुकूल हो तो बात ही क्या। समापन अवसर को खास बनाया मुख्य अतिथि की उपस्थिति ने। तो आपको यह बता दें की बांका के प्रशिक्षु आईएएस सह निवर्तमान सहायक समाहर्ता मिथिलेश मिश्र ने यह दायित्व बखूबी निभाया। यहाँ वे छात्रों के रंगों में रंगे से नजर आ रहे थे। एक प्रशासक की भूमिका नहीं थी एक गुरु के बोल छात्रों को लाभान्वित कर रहे थे। गजब का उत्साह था समारोह में, गजब की फूर्ति थी माहौल में। सिर्फ छात्र ही नहीं सभा में मौजूद हर कोई खुश था। संस्थान के निदेशक राजिक राज ने भी छात्रों के बीच अपने विचार रखे।


मिथिलेश मिश्र का सम्मान करते संस्थान के निदेशक राजिक राज