" ज्ञान है तो जहां है"
अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है
आप सभी के विश्वास और प्यार से " ज्ञान है तो जहां है"
अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हिन्दी दिवस के अवसर पर वर्ष २०१२ में चुनौती
लिए आपके बीच दस्तक दिया और आपके सहयोग से लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है। यह एक ऐसा
जरिया है जहां आपसे किसी न किसी तरीके से बात-मुलाकात हो ही जाती है। हमने तो बस एक
कदम बढ़ाया था, आपका साथ मिलता गया और यह कारवां लगातार बढ़ता चला जा रहा है। आशा है
और विश्वास भी की आपका सहयोग हमेशा मिलता रहेगा। आप सभी को साधुवाद।आइए हमसे बात कीजिए।
कुछ आप कहिएगा, कुछ हम सुन लेते। कुछ हम कहेंगे, कुछ आप सुन लिया कीजिएगा। तो क्या
कहते हैं? हैं न तैयार।यहां तक की यात्रा में हमने भी बहुत उतार चढ़ाव देखे। समय के
साथ हमने भी रार किया। कभी लगा कि अब कैसे होगा, डगर कठिन लगने लगी। हौसला कमजोर पड़ता
दिखने लगा, लेकिन हार नहीं मानी हमने। हम बढ़ते रहे, राह चलते गए, फूलों से भी दोस्ती
की और कांटों को भी ना नहीं कहा। सभी के साथ चलने के लिए हर प्रयास किया। आज जब याद
करते हैं तो पता ही नहीं चलता कि कैसे बीत गए दो बरस। क्या सचमुच हमने बाधाएं पार कर
ली या फिर चुनौतियां अभी और भी है। तत्क्षण ही लगता है जैसे अभी तक अपनों के भरोसे
हर चुनौती स्वीकार की आगे भी नैया पार कर लेंगे। अगर सागर गहरा है तो नाव भी कुशल खेवैया
के हाथों है। कितने का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग हमें मिल रहा है यह तो पता
नहीं। लेकिन हमारा कुनबा बढ़ा है इसका यकीन है। भविष्य में इसमें क्या परिवर्तन हो
सकता है आप जरूर बताएं। आपके सुझाव का हमें इन्तजार रहेगा। अपने कीमती समय में से कुछ
सेकेंड हमारे लिए जरूर निकालें। आप सभी को शुभकामनाएं और धन्यवाद।
आप सबों के साथ बिताए कुछ हसीन पल:-
आप सबों के साथ बिताए कुछ हसीन पल:-

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